Bibi-Ka-Makbara, Aurangabad

Aurangabad Caves, Aurangabad

Nasik Caves, Nasik

Ajanta Caves, Aurangabad

Ellora Caves, Aurangabad

Quila-I-Shakin, Daulatabad Fort, Aurangabad

विधान

भारत में सर्वप्रथम पुरावशेषों संबंधी विधान के प्रवर्तन को आरंभिक 19वीं शताब्दी के सांस्कृरतिक नव चेतना ने देखा जिसे बंगाल रेगुलेशन XIX ऑफ 1810 के नाम से जाना गया । इसका तुरन्तं बाद ही एक नया विधान बनाया गया जिसे मद्रास रेगुलेशन VII ऑफ 1817 के नाम से जाना गया । इन दोनों विधानों में सरकार को निजी भवनों में दुरूपयोग की आशंका होने पर हस्त क्षेप करने की शक्तिद दी गई। तथापि, दोनों अधिनियमों में निजी स्वा मित्वक वाले भवनों के बारे में कुछ नहीं कहा गया । अत: अधिनियम XX ऑफ 1863 सरकार को अपने पुरावशेषों अथवा अपने ऐतिहासिक या वास्तुअशिल्पीअ मूल्योंव के कारण प्रसिद्ध भवनों को होने वाले नुकसान से बचाने और उन्हेंस परिरक्षित करने के लिए शक्ति् प्रदान करने हेतु लागू किया गया था ।

संयोग से पाए गए किन्तुर पुरातत्वीकय और ऐतिहासिक महत्वक रखने वाली संपदा की संरक्षा करने और परिरक्षित करने के लिए द इंडियन ट्रेजर ट्रोव एक्ट , 1878 (एक्ट नं.VI ऑफ 1878) लागू किया गया था । यह अधिनियम ऐसी संपदा की संरक्षा और परिरक्षा करने और उनके विधिसम्मवत निपटान के लिए लागू किया गया था । 1886 में युगांतरकारी विकास में, तत्काकलीन महानिदेशक जेम्सन बर्गेस सरकार पर भारतीय पुरातत्वे सर्वेक्षण की पूर्व सहमति के बिना किसी व्यीक्तिे या एजेंसी को उत्खबनन करने से रोकने और सरकार की अनुमति के बिना प्राप्त या अधिगृहीत पुरावशेषों का निपटान करने से अधिकारियों को रोकने संबंधी निर्देश जारी करने का दबाव डालने में सफल रहे ।

सांस्कृीतिक विरासत का नए युग में प्रवेश उस समय हुआ जब प्राचीन संस्मांरक परिरक्षण अधिनियम, 1904 (एक्ट् सं. VII ऑफ 1904) लागू किया गया था । इस अधिनियम ने विशेषकर उन स्माीरकों पर जो व्य क्तिरगत या निजी स्वाIमित्वम में थे, पर प्रभावी परिरक्षण और शक्तिव प्रदान की । चूंकि यह अधिनियम रद्द नहीं किया गया है, अत: यह लागू की तरह ही माना जाता है । अगला अधिनियम पुरावशेष निर्यात नियंत्रण अधिनियम, 1947(एक्टा सं. XXXI ऑफ 1947) और इसका नियम था जिसमें इस अधिनियम के प्रयोजनार्थ महानिदेशक द्वारा जारी लाइसेंस के अधीन पुरावशेषों के निर्यात को विनियमित करने और उन्हें यह निर्णय करने की कोई मद, वस्तुX या चीज पुरावशेष है या नहीं की शक्तिि प्रदान करने और उनके निर्णय को अंतिम माने जाने की व्यतवस्थाच की गई थी ।

1951 में प्राचीन तथा ऐतिहासिक स्मा्रक और पुरातत्वीयय स्थयल एवं अवशेष (राष्ट्री य महत्वक की घोषणा) अधिनियम, 1951 (सं. IXX ऑफ 1951) लागू किया गया था । परिणामस्वषरूप, सभी प्राचीन और ऐतिहासिक स्मा)रक एवं पुरातत्वीरय स्थ ल एवं अवशेष पहले प्राचीन संस्मा)रक परिरक्षण अधिनियम, 1904 (एक्टा सं. VII ऑफ 1904) के अधीन संरक्षित थे जिन्हेंा इस अधिनियम के अधीन पुन: राष्ट्री य महत्व के स्माIरकों और पुरातत्वीीय स्थासनों के रूप में घोषित किया गया था । अन्यन चार सौ पचास स्मावरक और स्थंल भाग ख राज्यों के भी शामिल किए गए थे । कुछ और स्मा्रकों और पुरातत्वींय स्थ लों को भी राज्य् विनियमन अधिनियम, 1956 की धारा 126 के अधीन राष्ट्री य महत्वं का घोषित किया गया था।

अधिनियम को संवैधानिक व्य‍वस्थावओं के अनुरूप लाने और देश की पुरातत्वीरय संपदा को बेहतर और प्रभावी परिरक्षण प्रदान करने के लिए प्राचीन संस्मानरक तथा पुरातत्वीतय स्थ ल और अवशेष अधिनियम, 1958 (सं.1958 का 24) 28 अगस्तल, 1958 को लागू किया गया था । इस अधिनियम में राष्ट्री य महत्वक के प्राचीन एवं ऐतिहासिक स्माररकों तथा पुरातत्वीअय स्थ लों एवं अवशेषों का परिरक्षण करने, पुरातत्वीेय उत्ख1ननों का विनियमन करने और मूर्तियों, नक्का्शियो तथा अन्यश इसी प्रकार की वस्तुकओं को संरक्षण की व्ययवस्थाए की गई है । बाद में प्राचीन संस्मा,रक तथा पुरातत्वी य स्थकल और अवशेष नियम, 1959 बनाए गए थे । यह अधिनियम नियमों के साथ 15 अक्तूपबर, 1959 को लागू हुआ । इस अधिनियम ने प्राचीन तथा ऐतिहासिक स्मायरक एवं पुरातत्वीसय स्थऔल और अवशेष (राष्ट्री य महत्व की घोषणा) अधिनियम, 1951 को समाप्तल कर दिया ।

पुरावशेष तथा बहुमूल्य् कलाकृति अधिनियम, 1972 (सं.52 ऑफ 1972) अद्यतन अधिनियम है जिसे पुरावशेषों तथा बहुमूल्यय कलाकृतियों वाली सांस्कृकतिक संपदा के लाने-ले जाने पर प्रभावी नियंत्रण रखने के लिए 5 सितम्बकर, 1972 को लागू किया गया था । यह अधिनियम पुरावशेषों तथा बहुमूल्य कलाकृतियों के निर्यात व्या,पार को विनियमित करता है, पुरावशेषों की तस्कंरी और उनमें धोखाधड़ी को रोकने की व्यिवस्थाक करता है, सार्वजनिक स्था नों में पुरावशेषों तथा बहुमूल्यर कलाकृतियों के अनिवार्य अधिग्रहण की व्यंवस्थार करता है और इससे संबंधित या प्रासंगिक या आनुषंगिक कतिपय अन्यध मामलों की व्य्वस्था करता है । यह अधिनियम पुरावशेषों तथा बहुमूल्यश कलाकृति नियम, 1973 का भी पूरक रहा । अधिनियम और नियम 5 अप्रैल, 1976 से प्रभावी हैं । इस विधान ने पुरावशेष निर्यात नियंत्रण अधिनियम, 1947 (एक्टि सं. XXXI ऑफ 1947) को रद्द कर दिया ।

  • पुरावशेष तथा बहुमूल्य कलाकृतियों नियम, 1973
  • फार्म I लाइसेंस के लिए आवेदन, बेचने के व्यवसाय पर या प्राचीन वस्तुओं को बेचने की पेशकश
  • फार्म- IA व्यवसाय के लिए आवेदन नए सिरे के लाइसेंस के बेचने के पर ओर एक की एवज में पुरावशेषों मुहर की पेशकश की, जिनमें से धारक मर गया है.
  • फार्म II -लाइसेंस जो की सुविदय व्यवसाय बेचने के बेचने कइ लिए या पुरावशेषों को बेचने की पेशकश
  • फार्म-II A नियम 6
  • फार्म-III प्राचीन वस्तुओं की बिक्री या अधिग्रहण की मासिक रिटर्न
  • फार्म IV प्राचीन वस्तुओं का पंजीकरण
  • फार्म V स्टॉक की घोषणा
  • फार्म VI - स्टॉक की घोषणा (नियम 6 (कश्मीर) के तहत शर्तों, (ओ) और 9 (ख)
  • फार्म VII प्राचीन वस्तुओं के पंजीकरण के लिए आवेदन (नियम 11 देखें)
  • फार्म VIII प्राचीन वस्तुओं के पंजीकरण का प्रमाण पत्र (नियम 12 देखें)
  • फार्म IX स्वामित्व के हस्तांतरण
  • फार्म X
  • अनुभाग बी नए मालिक द्वारा पूरा किया जा