Bibi-Ka-Makbara, Aurangabad

Aurangabad Caves, Aurangabad

Nasik Caves, Nasik

Ajanta Caves, Aurangabad

Ellora Caves, Aurangabad

Quila-I-Shakin, Daulatabad Fort, Aurangabad

औरंगाबाद मंडल का परिचय

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के औरंगाबाद मंडल को प्रारम्भ में पश्चिमी मंडल के नाम से जाना जाता था | हालांकि आजादी के पश्चात वर्ष 1953 में इसे विभाजित कर दक्षिण-पश्चिम मंडल का नाम दिया गया जिसका मुख्यालय पुने मे स्थित था | वर्ष 1964 में मुख्यालय को पुने से औरंगाबाद स्थानांतरित किया गया | वर्ष 1961 में जब गोआ को पूर्ण राज्य का दर्जा प्राप्त हुआ तब प्रशासकीय दृष्टि से इसके कुछ स्मारक औरंगाबाद मंडल के अधीन लाये गये | वर्ष 1975 में मंडलो के राज्यों के आधार पर किये गये सीमांकन के फलस्वरूप दक्षिन पश्चिम मंडल कर्नाटक राज्य के अधीन आया तथा मध्य प्रदेश एवं हैदराबाद के कुछ स्मारक इस मंडल के अधीन आये |

|तदुपरांत 1985 में दक्षिण पश्चिम मंडल का नाम बदलकर औरंगाबाद मंडल किया गया और इसके अंतर्गत महाराष्ट्र और गोवा राज्य लाये गये | सन् 2004 में औरंगाबाद एवम् मुम्बई को अलग मंडल बना दिया गया | औरंगाबाद मंडल के अधीन कुल 168 केंद्रीय संरक्षित स्मारक हैं | औरंगाबाद मंडल के कार्यो को सुचारू रूप से चलाने के लिये अजंता, एलोरा, चंद्रपुर, नागपुर,लोनार, नशिक, बीबी का मक़बरा,दौलताबाद, अहमदनगर उपमंडल बनाए गए हैं | इन उप मंडलो के प्रमुख, वरिष्ठ सम्वर्धन सहायक / सम्वर्धन सहायक श्रेणी – 1\ सम्वर्धन सहायक श्रेणी – 2 / फोर्मैन(कार्य) हैं |

औरंगाबाद मंडल के अंतर्गत दो विश्व विरासत स्मारक क्रमशः अजंता, एलोरा गुफाए हैं | इसके अलावा अन्य महत्वपूर्ण स्थलो एवम् स्मारको में नेवासा, दायमाबाद, पैठण, पित्तलखोरा, लोणार, मार्काण्डादेव, दौलताबाद किला, बीबी का मकबरा आदि उल्लेखनीय स्मारक हैं |

औरंगाबाद मंडल की गतिविधियां

प्राचीन स्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल एवम् अवशेष अधिनियम 1958, तथा प्राचीन एवं बहुमूल्य कलाकृति अधिनियम 1972 के आलोक में मंडल कार्यालय द्वारा अनेक कार्य किया जाता है | इस मंडल का मुख्य कार्य इसके अधिकार क्षेत्र में आने वाले स्मारको का अनुरक्षण करना, अपनी देखरेख में स्मारको, स्थलो एवम् अवशेषो की सुरक्षा करना, किसी भी प्रकार के अतिक्रमण, क्षति आदि को रोकना, संरक्षित सीमाओ से 300 मीटर तक खनन और आधुनिक निर्माण कार्य कलापो पर प्रतिबंध लगाना | स्मारको और स्थलो का अनुरक्षण तथा संरक्षण करना,प्राचीन स्थलो, अवशेषो आदि का गाव – गाव जाकर सर्वेक्षण करना प्रचीन स्थलो का उत्खनन करना,केंद्रीय संरक्षण के अंतर्गत आने वाले स्मारको, मूर्तियो आदि का प्रलेखन, क्षेत्र में पुरातत्वीय अनुसंधान करना, राज्य पुरातत्व विभागो और अन्य संस्थाओ के साथ सम्पर्क रखना | विश्व विरासत दिवस (18 अप्रैल), विश्व विरासत सप्ताह ((17-25 नवम्बर) तथा संग्रहालय दिवस (18 मई) मई) तथा अन्य आयोजन करना | पुरातत्वीय क्रियाकलापो से सम्बंधित सभी मामलो पर अनुसन्धानकर्ताओ तथा साधारण जनता को सहयता देना | मंडल का सामान्य प्रशासन चलाना, मंडल को आबंटित निधियो पर उचित वित्तीय नियंत्रण रखना और उनका उचित उपयोग सुनिश्चित करना आदि हैं |

कर्मचारियों की संख्या

मंडल कार्यालय के प्रमुख अधीक्षण पुरातत्वविद होते हैं जो स्मारकों के प्रबंधन , संरक्षण के लिये उत्तरदायी होते हैं | अधीक्षण पुरातत्वविद की सहायता के लिये उप अधीक्षण पुरातत्वविद, सहायक पुरातत्वविद, सर्वेक्षक, फोटोग्राफर, तथा अन्य कर्मचारी होते हैं जो उन्हे पुरातत्वीय अन्वेषण तथा उत्खनन मे सहायता प्रदान करते हैं | पुरातत्वीय संरक्षण के क्षेत्र में अधीक्षण पुरातत्वविद की सहायता हेतु उप अधीक्षण पुरातत्वीय अभियंता, सहायक अधीक्षण पुरातत्वीय अभियंता तथा संरक्षण सहायक होते हैं | इसके अतिरिक्त, सामान्य प्रशासन एवं लेखा के देख रेख हेतु अन्य कई कई अनुसचिवीय कर्मचारी होते हैं |